Saturday, July 18, 2020

Havelis are in danger









 

Havelis are being sold


Bikaner. The danger of Bikaner becoming deodorant remains constant. The havelis considered to be the decoration of Bikaner are being sold one by one. More than two dozen havelis have been sold in Bikaner city A large number of havelis are being sold from Bikaner to Jodhpur, Mumbai.

Parts of Havelis are being sold off at many places including Daga Chowk, Bikaner Chowk, Banthia Chowk, Bikaner. Not a thousand, now this city was known as Hundreds of Thousand Havelis, but due to the constant sale of the Havelis after being unloaded, the number of them has been reduced to seven hundred and fifty.



         
          Apart from this, havelis were also built keeping in mind the winter and summer. In Bikaner, which became part of hotels, parts of havelis are being sold and sold, they are being made part of hotels. Parts of Havelian are becoming the pride of hotels in many places behind Gajner Road, Lalgarh Palace, Dr. Karani Singh Stadium. The litterateur Upadhyan Chandra Kochhar struggled for a long time to save the havelis. Experts say that there will be nothing left in Bikaner for the attraction of tourists when the havelis are not saved.


बीकानेर के शृंगारहीन होने का खतरा 

बीकानेर। बीकानेर के शृंगारहीन होने का खतरा लगातार बना हुआ है। बीकानेर का शृंगार मानी जाने वाली हवेलियों को एक-एक कर बेचा जा रहा है। बीकानेर शहर में करीब दो दर्जन से अधिक हवेलियों को बेचा जा चुका है। बीकानेर से जोधपुर, मुम्बई में बड़ी संख्या में हवेलियों को उतार कर बेचा जा रहा है। बीकानेर के डागा चौक, आसानियों का चौक, बांठिया चौक, सहित अनेक स्थानों हवेलियों के हिस्से उतार कर बेचे जा रहे हैं।

हजार नहीं अब सैंकड़ों
यह शहर हजार हवेलियों के शहर के नाम से जाना जाता था, लेकिन हवेलियों को लगातार उतार कर बेचे जाने के कारण वर्तमान में इनकी संख्या करीब साढ़े सात सौ तक रह गई है। बीकानेर में हवेली यात्रा निकाल कर हवेलियों की संख्या की गणना की गई थी। इसके बाद से करीब ढ़ाई सौ हवेलियां उतर चुकी है। हाल ही में बड़ा बाजार क्षेत्र से हवेली को बेचा गया है।


स्थापत्य कला के बेमिसाल नमूने
बीकानेर की हवेलियां स्थापत्य कला के बेमिसाल नमूने हैं। लाल पत्थरों पर कोरनी कला से उकेरी गई फूल पत्तियोंं की छटा देखते ही बनती है। अनेक स्थानों पर मेहराव, गुम्बद देखने वाले का ध्यान बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हवेलियों पर किए गए स्थापत्य कार्य को देखकर इसे दाडि़म नगरी भी कहा गया है। हवेली के न केवल बाहर बल्कि भीतर भी बेमिसाल पेन्टिंग का कार्य है। इसके अलावा सर्दी व गर्मी को ध्यान में रखते हुए भी हवेलियों का निर्माण किया गया था। 

 होटलोंं का भी हिस्सा बने

बीकानेर मेंं हवेलियों के हिस्से उतारकर बेचे जा रहे हैं, इन्हें होटलों का हिस्सा बनाया जा रहा है। गजनेर रोड, लालगढ़ पैलेस, डॉ.करणी सिंह स्टेडियम के पीछे अनेक स्थानों पर हवेलियोंं के हिस्से होटलों की शान बन रहे हैं। हवेलियों को बचाने के लिए साहित्यकार उपध्यान चन्द्र कोचर ने लम्बे समय तक संघर्ष किया था। वहीं जानकारों का कहना है कि जब हवेलियां ही नहीं बचेंगी तो सैलानियों के आकर्षण के लिए बीकानेर मेंं कुछ नहीं बचेगा।



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